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गली मैं बदनामी का आलम कुछ यूँ है की उपवास के लिए चिप्स लेने जाओ, तो दुकानदार पूछता है Disposable glass कितने देने हैं?

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वो आज घुस गया पाखाने में, मयखाना समझकर, डब्बा उठा के पी गया, पैमाना समझकर

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हड्डियां तोड़ने में वो मजा नहीं जो तेरी अकड़ तोड़ने में है

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उधर आप मजबूर बैठे हैं; इधर हम खामोश बैठे है; बात हो तो कैसे हो; जब दोनों तरफ दो कंजूस बैठे हैं!

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तिलक, तराजू और तलवार सबने जमकर मारे जूते चार

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