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कानून अँधा होता है, आजकल गूंगा, बहरा और नपुंसक भी

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रामचंद्र कह रहे सिया से, ऐसा कलयुग आयेगा, मेरा जन्म कहां हुआ, सुप्रीमकोर्ट बतलायेगा

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