All posts in Funny Hindi Poetry on Media – India

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शोर करते रहो तुम सुर्ख़ियों में आने को हमारी तो खामोशियाँ भी अखबार हैं

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ये मौसम भी “बरखा दत्त” हो गया है

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दिबांग जी ….आप अद्भुत हो या आपके शब्द

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कैसी विडम्बना है एक साधू का धर्म जाति सब ढूंढ लिया मिडिया वालों ने, लेकिन आंतकवादीयों का धर्म और जाति अभी तक नहीं ढूंढ पाए हैं

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धर्म के नाम पर हमको लाडवा लो… राजनीति, हमसे कर्म का कांड बनबा लो… मीडिया

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यूपी में मायावती को आगे बताने वाला अपने गणित में बहुत पीछे रह गया

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बनते ये पत्रकार हैं, बिकते सरे बाज़ार हैं, इंसानियत पे भार हैं, बागो मे बहार है

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