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तीन साल मेँ टूटी आस… ना रोजगार ना विकास.. सबके साथ समान विनाश.. सिर्फ भाषण और मन की बात..

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उतना ही बोला करो, जितना कर सको, लोग वैसे ही परेशान है आप लोगो के जुमलो से

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