All posts in Funny Hindi Poetry on Sagarika Ghose

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बिकतें थे हुक्मरान हमें कब था , इसका गम, रोना तो इस बात का है , कि इस मुल्क के अखबार बिक गए

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तुम सीधी बैलेट पेपर जैसी, मैं कैप्चर होता बूथ प्रिये, तुम हैक हुई ईवीएम जैसी, मैं सिग्नल देता ब्लूटूथ प्रिये

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कलम हाथ मेँ है,खंजर की क्या जरुरत हमे पढे लिखे है, सलीके से कत्ल करते है

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तुम इतना क्यों RT दिए जा रहे हो क्या ट्वीट किया है जिसको छिपा रहे हो

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इतनी जल्दी कॉपी तो फोटो कॉपी मशीन भी नही करती है जितनीं जल्दी ट्वीट कॉपी होते है

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हमेशा जिन्दगी में ऐसे लोगों को पसंद करो जिनका दिल चेहरे से ज्यादा खुबसुरत हो

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